हो आया पर्व पर्यूषण आया
हो आया पर्व पर्यूषण आया
आनंद उत्सव तप का महोत्सव
रंग अनेको लाया
हो आया पर्व पर्यूषण आया
हो आया पर्व पर्यूषण आया
क्षमापना जीव दया से हमको
मुक्ति दिलाने आया
जिनवर नो दरबार सजाओ आंगन मां
जिनवाणी जयनाद गुंजे शासन मां
अष्ट द्रव्य सू पूजा भणावो मन्दिर मां
आओ रे सखियो भक्ति रचाओ जिनवर ना
संयम नो उमंग जगाओ अंतस मा
धर्म ध्वजा लहराओ भगतो शासन ना
संयम नो उमंग जगाओ अंतस मा
धर्म ध्वजा लहराओ भगतो शासन ना
हो जीव दया से प्रित जगाओ
पापो से मोह हटाओ
तपस्या ज्योति से साधना मोति से
आतम का मैल मिटाओ
गुरु चरणो में नम जाओ
जिनवर की महिमा गाओ
लाख चौरासी को खमा के
मुक्ति पुरी मे जाओ
जिनवर नो दरबार सजाओ आंगन मां
जिनवाणी जयनाद गुंजे शासन मां
अष्ट द्रव्य सू पूजा भणावो मन्दिर मां
आओ रे सखियो भक्ति रचाओ जिनवर ना
संयम नो उमंग जगाओ अंतस मा
धर्म ध्वजा लहराओ भगतो शासन ना
जल चन्दन फल फूल चढावो मंदिरमां
जग मग जग मग ज्योत जलाओ जिनवरना
Source: Dhairya Rathod


