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Library > महावीर स्वामी स्तवन
“निर्वाण कल्याणक आरती"

जय जगदीश्वर अति अलवेसर वीर प्रभु राया 
पतित 'उद्धरण भव भय भंजण बोध बीज पाया 
जय जय जिन राया, आरती करूं मन भाया, 
होय कंचन काया जय जय जिन राया। 

जब मन विर गाये

जब मन विर गाये मन का अंधेरा जाये 
ज्ञान का प्रकाश पाये, जागो हे मेरे मन महावीर स्वामी 
जागो रे जागो रे जागो दुनिया जागो 2. 
मगर नगर सब सथ मलियाँ जागी 

महावीर जी के दर पे

आ आ आ
रे प्राणी आ...... आ...... आ 
महावीर जी के दर पे आके हो   2 
महावीर जी के गुण गा........  गा..... 

आके दर्श दिखाओ

सुनो सुनो मेरे महावीर स्वामीजी तुम आओजी
आके दर्श दिखाओ दिखाओजी, आओजी 
स्वामी मेरे महावीर स्वामी 
तुम्हारे बीना खाली जिंदगी का पिंजरा 

त्रिशला नंदन जय

त्रिशला नंदन जय जय भंजन 
दरश देना 2 
तेरे द्वार खड़ी प्रभु विनंती सुन लेना 
दर दर भटके जन्म जन्म से महावीरा 

महावीर स्वामी - अन्तरयामी

सदियों से तेरा जिनवर दुनिया में नाम था सब की जुबान था। 
महावीर स्वामी-अन्तयामी  
अनुपम त्रिशला मां का सबको पैंगाम  ॥ जग को सन्देश था। 
महावीर स्वामी-अन्तरयामी ॥

मंगलाचरण

वंदन हो, वंदन हो,
मंगलमय महावीर! वंदन हो…
त्रिशला नंदन, भवभय भंजन, पाप निकंदन हो। वंदन हो। 
वंदन हो जग बंधन तोड्यां, भवोभव केरा फंदन फोड्यां

महावीर तेरा मुझको

महावीर तेरा मुझको २ दीदार हो जाये,
उजड़ा चमन फिर से गुलजार हो जाये,
महावीर तेरा मुझको.....
कैसे चलेगी वीरा, तुफान में नैया

महावीर स्तुति: जय बोलो महावीर स्वामी की

जय बोलो महावीर स्वामी की। 
घट-घट के अंर्तयामी की। 
जय बोलो महावीर स्वामी की ॥ 
इस जगत का उद्धार किया

श्री घंटाकर्ण महावीर स्तोत्र

ॐ घंटाकर्णो महावीरः सर्वव्याधि-विनाशकः।
विस्फोटक भयं प्राप्ते, रक्ष-रक्ष महाबलः ॥1॥
यत्र त्वं तिष्ठसे देव! लिखितोऽक्षर-पंक्तिभिः।
रोगास्तत्र प्रणश्यन्ति, वात पित्त कफोद्भवाः ॥2॥