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Library > प्रभु भक्ति
अथ देव-शास्त्र-गुरु पूजा

प्रथम देव अरहंत, सुश्रुत सिद्धांत जू।
गुरु निर्गन्थ महन्त, मुकतिपुर पन्थ जू।
तीन रतन जग मांहि सो ये भवि ध्याइ़ये।
तिनकी भक्ति प्रसाद परमपद पाइये॥

इक प्यार का नगमा है

बचपन से सुना हमने, मालिक तू हमारा है
हम पे आई मुसीबत तो, दिया तूने सहारा है
 लोरियों की जगह बाबा तेरे भजनों को सुनते थे
सुनकर तेरे भजनों को सपने यही बुनते थे

फूलो का तारो का सबका कहना है

फूलो का तारो का सबका कहना है, एक हजारो मेरे गुरुवर है,
सारी उमर गुरु की भक्ति करना है,
फूलो का तारो का सबका कहना हैं, एक हजारो मेरे गुरुवर है,
सारी उमर गुरु की भक्ति करना है, फूलो का तारो का सबका कहना है।।

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो
तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो
तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो
तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो

भगवान मेरी नैया उस पार लगा ...

भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना
जब तक तो निभाया है आगे भी निभा देना
हम दीन दुःखी निर्धन, नित नाम जपे प्रतिपल
यह सोच दरश दोगे, प्रभु आज नहीं तो कल

तुम से लागी लगन

तुम से लागी लगन, ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा।।
मेटो मेटो जी संकट हमारा ...
निश-दिन तुमको जपूँ, पर से नेहा तजूँ जीवन सारा।
तेरे चरणों में बीते हमारा, मेटो मेटो जी संकट हमारा॥

बाजे छम छम छम छमा छम बाजे घुँघरू बाजे घुँघरू०

बाजे छम छम छम छमा छम बाजे घुँघरू बाजे घुँघरू०
हाथों में दीपक लेकर आरती करूँ
बाजे छम छम०
प्रभु को उठाया हाथी पे बैठाया २

बजे कुण्डलपर में बधाई

बजे कुण्डलपर में बधाई,
के नगरी में वीर जन्मे, महावीर जी
जागे भाग हैं त्रिशला माँ के,
के त्रिभवन के नाथ जन्मे, महावीर जी


राजीमती ने नेमजी

विर्तिनी वाटे चाल्या,
राजीमती ने नेमजी
सामु जोइने स्वामी,
मन लोभावो प्रेमथी (2)

रैवतगीरी दरबार जाजरमान लागे छे

जल पूजा जुगते करी मेल अनादि विनाश
जल पूजा फल मुज होजो मांगु ऐम प्रभु पास
मेरू शिखर न्हवरावे हो सुरपति
मेरु शिखर न्हवरावे