Thursday, 1 October, 2026
जगचिंतामणि जगगुरु, जगत शरण आधार;
अढार कोडाकोडी सागरे, धरम चलावणहार ...
अषाढ वदि चोथें प्रभु, स्वर्ग थी लीये अवतार;
चैतर वदि आठम दिने, जनम्या जगदाधार रे ...
पांचसे धनुषनी देहडी, सोवन वरण शरीर;
चैतर वदि आठमें लियें, संजम महा वडवीर ...
अढार कोडाकोडी ... जगचिंतामणि जगगुरु ...
लाल रे ... लाल रे ... लाल रे ...
फागण वदि ईग्यारसें, पाम्या पंचम ज्ञान;
महा वदि तेरसे शिव-वर्या, जोग निरोध करी जाण ...
चोराशी लाख पूर्वनुं, जिनवर उत्तम आय;
"पझ्मविजय" कहे प्रणमतां, वहेलुं शिवसुख थाय ...
अढार कोडाकोडी ... जगचिंतामणि जगगुरु ...
लाल रे ... लाल रे ... लाल रे ...
Source: Jaydeep Swadia


