हे ... नेम प्रभुना पान पगले थयो, धन्य पेलो गिरनार,
जय गिरनार ... जय गिरनार ... जय जय गरवो गिरनार ...


जय जय गरवो गिरनार, जय जय गरवो गिरनार,
नेमनाथ गिरी शणगार, जय जय गरवो गिरनार,
वंदन वंदन वंदन वंदन, गिरनार तने वंदन, 
वंदन वंदन वंदन वंदन, नेमिनाथ तने वंदन ...


पंचम शिखर शत्रुजय तणु ए, सिद्धगिरी छे धाम,
कैलास उज्जयंत रैवत नंदभद्र स्वर्णगिरी गिरनार,
नमो कर्ण विहार प्रासाद, जय जय गरवो गिरनार (2) ... 1


ज्यां शोभे अंबिका मां, शासन ने सदा सुखकार,
भावे प्रणमुं श्री नेमि जिनेश्वर गिरी भुषण शणगार,
पृथ्वी ना तिलक समान, जय जय गरवो गिरनार (2) .. 2


छे अनंत आत्मा ओ तणी, दिक्षा भुमी गिरनार,
छे अनंत तीर्थंकरो तणी, कैवल्य भुमी गिरनार,
ने आवती चोवीसी तणी, निर्वाणभुमी गिरनार,
अध्यात्म नगरी गिरनार, जय जय गरवो गिरनार (2) ... 3


चौदह हजार नदी ना ज्यां जल समाया, शीतल गज पद कुंड,
ज्यां दृष्टि अणुभवे धन्यता जोई, राजुल रहनेमि टुंक,
दिक्षा केवल सहसावने, नमो समवसरण जिनबिंब,
दिपे शिखरो नी माळ, जय जय गरवो गिरनार (2) .... 4


Source: Paras Gada | Prashant Shah