Thursday, 12 August, 2021
_400_400.jpeg)
Nakoda Bhairuji Ki Chamatkaari Stuti
श्री संखेश्वर के दर्शन कर पुजू गोडीजी पाय |
श्री नाकोडा से नवनिधि मिले दर्शन से दुःख जाय || 1 ||
श्री नाकोडा से नवनिधि मिले दर्शन से दुःख जाय || 1 ||
श्री नाकोडा भैरव सुखदायक सुमरू तारु नाम |
जीवन सुखी करजो आप सिद्धि समृद्धि ना नाम || 2 ||
जीवन सुखी करजो आप सिद्धि समृद्धि ना नाम || 2 ||
अनेक मुसीबतों से लिपटा आया हूँ तेरे दर |
बिना सहारा लिए नहीं जा सकता अपने घर || 3 ||
बिना सहारा लिए नहीं जा सकता अपने घर || 3 ||
तेरा सहारा जिसने भी हर काम में ले लिया है |
उसका जीवन सभी संकटों से दूर हो गया है || 4 ||
उसका जीवन सभी संकटों से दूर हो गया है || 4 ||
देव नित्य मैं मांग करता हूँ तेरे दिव्य दर्शन की |
एक बार तू दिखा दे सूरत तेरे भव्य मुखड़े की || 5 ||
एक बार तू दिखा दे सूरत तेरे भव्य मुखड़े की || 5 ||
तेरे पास आने पर हर मुसीबत भाग जाती है |
तेरा द्वार चढ़ने पर हर राह नज़र आती है || 6 ||
तेरा द्वार चढ़ने पर हर राह नज़र आती है || 6 ||
नाकोडा भैरव का जिस घर में नाम लिया जाता है |
सवेरे उठते ही उसका हर काम बन जाता है || 7 ||
सवेरे उठते ही उसका हर काम बन जाता है || 7 ||
जिस घर में नहीं हो पाती काफी समय से संतान |
तेरी भक्ति के प्रभाव से उसे हो जाता है गर्भाधान || 8 ||
तेरी भक्ति के प्रभाव से उसे हो जाता है गर्भाधान || 8 ||
रोगी जो कि बहुत दिनों से भोगता है अधिक दुःख |
तेरे दर्शन करने से उसे मिल जावे सर्वसुख || 9 ||
तेरे दर्शन करने से उसे मिल जावे सर्वसुख || 9 ||
असाध्य रोगियों ने भी तेरे दरबार में सुख पाया है |
दुखियों के दुःख हरने में तू सबके सहाय आया है || 10 ||
दुखियों के दुःख हरने में तू सबके सहाय आया है || 10 ||
दुखी जिंदगियों में सुख भरने के लिए तू है प्रसिद्ध |
तेरी मानता से सभी जीव बन जाते हैं पूरे समृद्ध || 11 ||
तेरी मानता से सभी जीव बन जाते हैं पूरे समृद्ध || 11 ||
तेरे पांवों में पड़ जाने से सब पाप दूर हो जाते हैं |
तेरे दिव्य प्रभाव से सबके कष्ट भाग जाते हैं || 12 ||
तेरे दिव्य प्रभाव से सबके कष्ट भाग जाते हैं || 12 ||
तू जैसा दयालु रहता अपने सभी भक्तों पर |
वैसी ही दया करना हे नाथ मुझ यतीम पर || 13 ||
वैसी ही दया करना हे नाथ मुझ यतीम पर || 13 ||
तू घुट शक्ति का है वृहत परोपकारी भंडार |
अपने हज़ारों भक्तों से करता है एक सा प्यार || 14 ||
अपने हज़ारों भक्तों से करता है एक सा प्यार || 14 ||
अपने सभी भक्तों पर तू करता है एकसी नज़र |
हर भक्त पर तेरा चेहरा करता पूरा असर || 15 ||
हर भक्त पर तेरा चेहरा करता पूरा असर || 15 ||
तेरी कृपा से उसका हो जाये जल्दी बेडा पार |
तेरी शुभ दृष्टि से दरिद्री भी हो जाते है साहूकार || 16 ||
तेरी शुभ दृष्टि से दरिद्री भी हो जाते है साहूकार || 16 ||
हर दुःखों को काटने में तू देव है पूरा समर्थ |
तेरे चरणों में आकर हर भक्त साधता है स्वार्थ || 17 ||
तेरे चरणों में आकर हर भक्त साधता है स्वार्थ || 17 ||
तेरा नाम सुनकर दुखी जन भी सुखी हो जावे |
तेरे कदमों में गिरने से मेरे मनोरथ पूर्ण हो जावे || 18 ||
तेरे कदमों में गिरने से मेरे मनोरथ पूर्ण हो जावे || 18 ||
जिसका मनोबल आपके प्रति है बहुत मजबूत |
उसका शत्रुपक्ष भी क्या बिगाड़ सकता है हुजूर || 19 ||
उसका शत्रुपक्ष भी क्या बिगाड़ सकता है हुजूर || 19 ||
हुजूर आप हैं श्री नाकोडा तीर्थ के रक्षक |
हर यात्री आपके दरबार में होता नत मस्तक || 20 ||
हर यात्री आपके दरबार में होता नत मस्तक || 20 ||
आप जैसे दयालु के संपूर्ण सानिध्य में आकर |
हर जीव सुखी हो जाता है आपके दर्शन पाकर || 21 ||
हर जीव सुखी हो जाता है आपके दर्शन पाकर || 21 ||
नाकोडा तीर्थभूमि पर जो एक बार आता है |
अनेक विपदाओं से वह भयमुक्त हो जाता है || 22 ||
अनेक विपदाओं से वह भयमुक्त हो जाता है || 22 ||
वार्षिक मेले में जो आपके करता है प्रभु दर्शन |
उसका घर संसार बन जाता है सुख का प्रदर्शन || 23 ||
उसका घर संसार बन जाता है सुख का प्रदर्शन || 23 ||
जो भी सुंदर भोग लगाता आपको शादी विवाह पर |
उसके अनेक दुःख दूर हो जाते हैं राह से पर || 24 ||
उसके अनेक दुःख दूर हो जाते हैं राह से पर || 24 ||
गर्भाधान की इच्छा से जो करता है आपके दर्शन |
उसी वर्ष से उसे मिल जाता शुभाशिर्वाद वचन || 25 ||
उसी वर्ष से उसे मिल जाता शुभाशिर्वाद वचन || 25 ||
हर निराशावादी को आशा दिखती है आपमें |
कितना अच्छा होई जो आप दिखाई दें प्रत्यक्ष में || 26 ||
कितना अच्छा होई जो आप दिखाई दें प्रत्यक्ष में || 26 ||
धनहीन को मिलता है द्रव्य आपके ही प्रभाव से |
अपार संपत्ति को प्राप्त करता आपके ही प्यार से || 27 ||
अपार संपत्ति को प्राप्त करता आपके ही प्यार से || 27 ||
सभी भक्त पर आप दयालु से रहते हैं मालिक |
ऐसा स्नेह किसी अन्य से नहीं मिल सकता मेरे मालिक || 28 ||
ऐसा स्नेह किसी अन्य से नहीं मिल सकता मेरे मालिक || 28 ||
राजा से लेकर रंक तक होता है दर्शका इच्छुक |
आपका सुन्दर मुखड़ा देखकर खुश हो जाता भावुक || 29 ||
आपका सुन्दर मुखड़ा देखकर खुश हो जाता भावुक || 29 ||
जब से ही हम तेरे निकट आए हैं प्रतिपालक |
अन्य दर्शनी भी तेरे चमत्कार को विरदाते मालिक || 30 ||
अन्य दर्शनी भी तेरे चमत्कार को विरदाते मालिक || 30 ||
सभी वर्गके धर्मका लगा रहता है जमघट |
प्रसन्न होकर जाते हैं तेरे द्वार से हर वक्त || 31 ||
प्रसन्न होकर जाते हैं तेरे द्वार से हर वक्त || 31 ||
जो आनंद नाकोडा भैरव हम तुझ में पाते हैं |
अन्य किसी भी देव में नहीं मिलता जहाँ हम जाते हैं || 32 ||
अन्य किसी भी देव में नहीं मिलता जहाँ हम जाते हैं || 32 ||
धैर्य प्रसन्नता और मुस्कुराहट वाला है चेहरा |
देखकर झूम उठता है सभी भक्तों का ही चेहरा || 33 ||
देखकर झूम उठता है सभी भक्तों का ही चेहरा || 33 ||
आनंद विभोर होकर हम आते हैं तेरे दर्शन को |
सुख और समृद्धि दिलाओ अपने सभी भक्तों को || 34 ||
सुख और समृद्धि दिलाओ अपने सभी भक्तों को || 34 ||
आनंद छा गया है आज तेरे सुप्रसिद्ध नाम का |
हर घर में उजाला छा गया तेरे दिव्य प्रकाश का || 35 ||
हर घर में उजाला छा गया तेरे दिव्य प्रकाश का || 35 ||
तेरी उज्ज्वल ज्योति का हम करते हैं प्रेम से दर्शन |
देव दिलाओ हमें अपने बाकी रहे मनोरथ फल || 36 ||
देव दिलाओ हमें अपने बाकी रहे मनोरथ फल || 36 ||
व्यापार मेरा सदा एक सा बना रहे हर दम |
इसी आशा से झुकते हैं आपके चरणों में हम || 37 ||
इसी आशा से झुकते हैं आपके चरणों में हम || 37 ||
हर व्यापार ऊँचा उठे और कमाई देवे खूब |
मैं आपकी सेवा में रहूँ और धन कमाऊँ अखूट || 38 ||
मैं आपकी सेवा में रहूँ और धन कमाऊँ अखूट || 38 ||
सदा आपका स्मरण एक सा करूँ गरीब नवाज़ |
अन्य सभी को बतला दूँ आपके दर्शन का रिवाज || 39 ||
अन्य सभी को बतला दूँ आपके दर्शन का रिवाज || 39 ||
हज़ारों अनाथ सनाथ बन गए करीब आने से |
दुखियों के दर्द मिट जाते हैं आपका खुला द्वार पाने से || 40 ||
दुखियों के दर्द मिट जाते हैं आपका खुला द्वार पाने से || 40 ||
श्री नाकोडा तीर्थकी मरुभूमि है कितनी पवित्र |
जहाँ हज़ारों यात्री तेरी भक्ति में बजाते वाजित्र || 41 ||
जहाँ हज़ारों यात्री तेरी भक्ति में बजाते वाजित्र || 41 ||
कितनी ही विपदाओं से घिरा हैं क्यों न आगे द्वार |
सबको एक सा मिलता है वहाँ आपका प्यार || 42 ||
सबको एक सा मिलता है वहाँ आपका प्यार || 42 ||
जिस धरती पर मैंने आपके दर्शन को पाया है |
उसी धरती पर लाखों ने अपने दुखों को भुलाया है || 43 ||
उसी धरती पर लाखों ने अपने दुखों को भुलाया है || 43 ||
सदा आपका देखा गया है एक सा ही चमत्कार |
आकर्षित करता है भक्तों को आपके मुखड़ेका प्यार || 44 ||
आकर्षित करता है भक्तों को आपके मुखड़ेका प्यार || 44 ||
आपके दर्शन करके अपने आपको धन्य मानूँगा |
उसी दिन हकीकत में बदनसीबी को भगा पाऊँगा || 45 ||
उसी दिन हकीकत में बदनसीबी को भगा पाऊँगा || 45 ||
नवग्रहों की पीड़ा भी तेरे नाम से है मिट जाती |
अन्य कई उपग्रहों की भी शीघ्र शांति हो जाती || 46 ||
अन्य कई उपग्रहों की भी शीघ्र शांति हो जाती || 46 ||
हर दर्दी जब तेरी शरण ग्रहण कर लेता है |
सभी कष्टों से छुट्टी पाकर तेरी शरण समा जाता है || 47 ||
सभी कष्टों से छुट्टी पाकर तेरी शरण समा जाता है || 47 ||
अनेक दर्दियों ने अपने दुखों को भुलाया है |
तेरी प्यारी याद को दिल में समावेश कराया है || 48 ||
तेरी प्यारी याद को दिल में समावेश कराया है || 48 ||
तुझे नहीं भूल सकता इस जीवन में मेरे नाथ |
जन्मों जनम मिलता रहे सदा आपका एक सा साथ || 49 ||
जन्मों जनम मिलता रहे सदा आपका एक सा साथ || 49 ||
अच्छा बना रहूँ ऐसी आशा करता हूँ देव |
क्या मैं और भी अधिक सुखी बन सकूँ गा कृपालुदेव || 50 ||
क्या मैं और भी अधिक सुखी बन सकूँ गा कृपालुदेव || 50 ||
शरण में आए बाद शंका नहीं हो सकती लवलेश |
आपके दर्शन करनेसेमुझे हो जाता है प्रेम विशेष || 51 ||
आपके दर्शन करनेसेमुझे हो जाता है प्रेम विशेष || 51 ||
हर प्रभात उज्ज्वल हो और संध्या भी वैसी ही चाहिए |
नाकोडा के प्रभाव से मेरा जीवन शुद्ध होना चाहिए || 52 ||
नाकोडा के प्रभाव से मेरा जीवन शुद्ध होना चाहिए || 52 ||
नित जपता रहूँ मैंतेरे मूल मंत्र की पाँच माला |
मेरी अखंड साधना का जीवन में हो जावे उजाला || 53 ||
मेरी अखंड साधना का जीवन में हो जावे उजाला || 53 ||
उज्ज्वल भविष्य की हर आत्मा चिंता किया करती है |
आपके दर्शन से मुझे तो चिंता से मुक्ति मिलती है || 54 ||
आपके दर्शन से मुझे तो चिंता से मुक्ति मिलती है || 54 ||
भैरव शक्ति यंत्र के दर्शन से हो जाता खुमार |
तेरी शरण में कहीं भी पड़ा रहूँ दो ऐसा प्यार || 55 ||
तेरी शरण में कहीं भी पड़ा रहूँ दो ऐसा प्यार || 55 ||
क्या इतना हतभागी हूँ तेरे दर्शन नहीं पा सकता |
सभी दोष क्षमा कर दो ऐसा अन्याय नहीं हो सकता || 56 ||
सभी दोष क्षमा कर दो ऐसा अन्याय नहीं हो सकता || 56 ||
जब से भक्त बना हूँ प्रतिपालक तेरे दरबार का |
सभी दोष मिट गए हैं जीवन में दूर व्यवहार का || 57 ||
सभी दोष मिट गए हैं जीवन में दूर व्यवहार का || 57 ||
हर रोगी और भोगी तुझे एक से ही स्वार्थ से ध्याते हैं |
सभी अपने अपने कार्यों में सफलता को पाते हैं || 58 ||
सभी अपने अपने कार्यों में सफलता को पाते हैं || 58 ||
केवल मैं ही रहा हूँ जिसका बना नहीं है काम |
अब तो कृपा कर दो सो शीघ्र हो जावे शुभ काम || 59 ||
अब तो कृपा कर दो सो शीघ्र हो जावे शुभ काम || 59 ||
विपदाओं में फँस कर भी तुझे नहीं भूल सकता हूँ |
तेरे नाम का जाप जपना तो मैं नहीं छोड़ सकता हूँ || 60 ||
तेरे नाम का जाप जपना तो मैं नहीं छोड़ सकता हूँ || 60 ||
चाहे कितनी ही विपत्ति क्यों न आने पड़े मुझ पर |
तेरा ध्यान नहीं छोड़ सकता मैं एक पल भर || 61 ||
तेरा ध्यान नहीं छोड़ सकता मैं एक पल भर || 61 ||
चाहे मुसीबत का सागर उमड़ पड़े सिर पर |
तेरा ध्यान भूला नहीं सकता मैं एक क्षण भर || 62 ||
तेरा ध्यान भूला नहीं सकता मैं एक क्षण भर || 62 ||
लाखों भक्त जब तेरे दरबार में सुखी हो जाते हैं |
तो मुझसा दरिद्री क्यों न सुखी हो पावे है || 63 ||
तो मुझसा दरिद्री क्यों न सुखी हो पावे है || 63 ||
मुझे देव इसमें शंका लवलेश मात्र भी नहीं रही |
के आपके चरण छूने वाले भी कभी दुखी रहे || 64 ||
के आपके चरण छूने वाले भी कभी दुखी रहे || 64 ||
जो स्त्री आपका ध्यान है धरती नित्य प्रातः उठकर |
वो कभी भी बाँझ नहीं रह सकती जीवन भर || 65 ||
वो कभी भी बाँझ नहीं रह सकती जीवन भर || 65 ||
अनेक संकटों से उसका जीवन पार उतर जावेगा |
पार्श्वनाथ का नाम लेनेवाला मुक्ति को पावेगा || 66 ||
पार्श्वनाथ का नाम लेनेवाला मुक्ति को पावेगा || 66 ||
जो विद्यार्थी लेगा आपका सोते उठते नाम |
वो अच्छे अंकों से पास होगा इसमें शंका न जान || 67 ||
वो अच्छे अंकों से पास होगा इसमें शंका न जान || 67 ||
कोर्ट कचेरी वाला भी तुझे क्यों छोड़ पावेगा दयालु |
हारा हुआ केस भी जीत जायेगा तेरी भक्ति से कृपालु || 68 ||
हारा हुआ केस भी जीत जायेगा तेरी भक्ति से कृपालु || 68 ||
नाकोड़ा भैरव अगर किसी को कभी आ जावे कुबुद्धि |
तेरे नाम मात्र से पलभर में वो बन जावे सुबुद्धि || 69 ||
तेरे नाम मात्र से पलभर में वो बन जावे सुबुद्धि || 69 ||
हर यात्री तेरे दर्शन से अनंत सुख को पाता है |
जीवन में वो अनेक वांछित सिद्धियों को पाता है || 70 ||
जीवन में वो अनेक वांछित सिद्धियों को पाता है || 70 ||
आप की हर एक सिद्धि से उसे मिलेगा सुख भरपूर |
साथियों का जीवन वो बना पाएगा प्रेम विभोर || 71 ||
साथियों का जीवन वो बना पाएगा प्रेम विभोर || 71 ||
आपका जो भक्त होगा वो इससे नहीं घबराएगा |
क्योंकि आपकी दया दृष्टि का सहारा उसे मिल जाएगा || 72 ||
क्योंकि आपकी दया दृष्टि का सहारा उसे मिल जाएगा || 72 ||
नानाविधि रूप देखके भक्त चकित रह जाते हैं |
रोज नए रंग रूप में जब वे आपको पाते हैं || 73 ||
रोज नए रंग रूप में जब वे आपको पाते हैं || 73 ||
वार्षिक मेले की छटा भक्तों को करती आकर्षित |
छोटे मोटे सभी दर्शक घूमकर हो जाते पवित्र || 74 ||
छोटे मोटे सभी दर्शक घूमकर हो जाते पवित्र || 74 ||
तेरा नाम अगर कोई लेकर वस्तु छोड़ देता है |
तो वह क्षण मात्र में अपना काम बना लेता है || 75 ||
तो वह क्षण मात्र में अपना काम बना लेता है || 75 ||
जीवन सुखी बनाने में तू सबके सहायक होता है |
चरणों का दास बननेवालेका तू प्रतिपालक होता है || 76 ||
चरणों का दास बननेवालेका तू प्रतिपालक होता है || 76 ||
हर काम से सहायक बनने को कहते हैं नायक |
निराशाओं को तू आशाओं में फेर देता है सहायक || 77 ||
निराशाओं को तू आशाओं में फेर देता है सहायक || 77 ||
हर मुराद की तेरे नाम से सफलता मांगते है |
कभी निराश हुए न होंगे ऐसा हम जानते हैं || 78 ||
कभी निराश हुए न होंगे ऐसा हम जानते हैं || 78 ||
तेरा सहारा लिया है जिस दिन से देव हमने |
कभी नाकामयाब नहीं बने हैं अपने मन में || 79 ||
कभी नाकामयाब नहीं बने हैं अपने मन में || 79 ||
तेरे सभी भक्तों पे कृपालू एक सी दया रहती है |
मुझ गरीब के कामों में भी अवश्य कृपा करनी है || 80 ||
मुझ गरीब के कामों में भी अवश्य कृपा करनी है || 80 ||
मुझ जैसे अनाड़ी पर देव कृपा दृष्टि रखना |
बिगड़े हुए कामों में देव अवश्य सहाय करना || 81 ||
बिगड़े हुए कामों में देव अवश्य सहाय करना || 81 ||
खड्ग त्रिशूल और तलवार से तू दुश्मन को मारे |
किसी में शक्ति नहीं कि तुझे सामने आकर ललकारे || 82 ||
किसी में शक्ति नहीं कि तुझे सामने आकर ललकारे || 82 ||
तेरा लाल लाल चेहरा देख के दुश्मन भाग जावे |
डमरू की आवाज से थर थर काँपने लग जावे || 83 ||
डमरू की आवाज से थर थर काँपने लग जावे || 83 ||
जब दिखता है कोई तेरा भयानक बना हुआ चेहरा |
वो घबरा उठता है उस बेचारे का नाज़ुक मुखड़ा || 84 ||
वो घबरा उठता है उस बेचारे का नाज़ुक मुखड़ा || 84 ||
तू सभी दोस्त दुश्मन पर रखता है पूरा अंकुश |
क्या मजाल कोई तेरे दर्शन से नहीं हो पावे खुश || 85 ||
क्या मजाल कोई तेरे दर्शन से नहीं हो पावे खुश || 85 ||
जब किसी को सहारा नहीं मिलता तो आए तेरे पास |
ऐसे कई दीन दुखी जनों का तू बना हुआ है प्रकाश || 86 ||
ऐसे कई दीन दुखी जनों का तू बना हुआ है प्रकाश || 86 ||
तेरी आराधना से हजारों रोगियों के रोग कटते हैं |
कितने ही दुखी जन तेरे सहारे रोज़ाना पलते हैं || 87 ||
कितने ही दुखी जन तेरे सहारे रोज़ाना पलते हैं || 87 ||
आधी व्याधि उपाधि को मिटाता मिनटों में भैरव |
शाकिनी डाकिनी तो तेरे नाममात्र से भागते भैरव || 88 ||
शाकिनी डाकिनी तो तेरे नाममात्र से भागते भैरव || 88 ||
भूत प्रेत या नर पिशाच नहीं आ सकते तेरे पास |
किसी की ताकत नहीं कि फालतू कर जावे बकवास || 89 ||
किसी की ताकत नहीं कि फालतू कर जावे बकवास || 89 ||
अनादि काल से तेरा नाम एक सारा आस प्रसिद्ध |
हजारों साधकों ने तुझे दिव्य मंत्र से किया है सिद्ध || 90 ||
हजारों साधकों ने तुझे दिव्य मंत्र से किया है सिद्ध || 90 ||
थोड़ी सी दया दृष्टि प्रभु हम पर भी कर डालना |
जब से बने हैं तेरे भक्त सदा हमको संभालना || 91 ||
जब से बने हैं तेरे भक्त सदा हमको संभालना || 91 ||
नया काम तेरा नाम लिए बगैर नहीं कर पावेंगे |
हर काम में सिद्धि हम तो तेरे नाम से कर पाएं गे || 92 ||
हर काम में सिद्धि हम तो तेरे नाम से कर पाएं गे || 92 ||
इसमें ज़रा भी शंका हमें नहीं लगती परमेश्वर |
किंतु सभी को एक नज़र से प्यार करे प्राणेश्वर || 93 ||
किंतु सभी को एक नज़र से प्यार करे प्राणेश्वर || 93 ||
भयंकर पापों से घिरा दुष्ट भी आ जावे तेरे पास |
तू उसे क्षमा करे उसके जीवन का कर देविकास || 94 ||
तू उसे क्षमा करे उसके जीवन का कर देविकास || 94 ||
प्रत्येक नर नारी अपने स्वार्थ से तुझे ध्याता है |
तब तू परोपकारी व्यक्ति से उसे पास बुलाता है || 95 ||
तब तू परोपकारी व्यक्ति से उसे पास बुलाता है || 95 ||
सारे भारत में तू बना हुआ है जैन धर्म में विख्यात |
करोड़ों लोगों में तेरा नाम बना हुआ प्रख्यात || 96 ||
करोड़ों लोगों में तेरा नाम बना हुआ प्रख्यात || 96 ||
हर जीव तुझे देखकर प्रसन्न होता मन में |
सभी व्याधियों को तू नाश कर देता उसके तन में || 97 ||
सभी व्याधियों को तू नाश कर देता उसके तन में || 97 ||
कितने ही श्रद्धालु तेरे चरण में पड़े रहते हैं |
अनेक विपदाओं से हमेशा जो घिरे रहते हैं || 98 ||
अनेक विपदाओं से हमेशा जो घिरे रहते हैं || 98 ||
भैरव तू सभी भक्तों के दुःख क्षण में हर लेता है |
अनेक चिंताओं से छुड़ाकर तू उसे खुश कर देता है || 99 ||
अनेक चिंताओं से छुड़ाकर तू उसे खुश कर देता है || 99 ||
जो व्यक्ति करता है तेरी स्तुति का पाठ त्रिकाल |
उसके सभी काम धारे होए बन जावे तत्काल || 100 ||
उसके सभी काम धारे होए बन जावे तत्काल || 100 ||
इस बात में शंका मत करना लवलेश मात्र भी |
क्योंकि सत घटना इसमें लिखी है भैरवनाथ की || 101 ||
क्योंकि सत घटना इसमें लिखी है भैरवनाथ की || 101 ||
चाहे किसी भी भक्त से पूछना शंका बिना किए |
क्योंकि हजारों बोल जावेंगे अपनी बात के लिए || 102 ||
क्योंकि हजारों बोल जावेंगे अपनी बात के लिए || 102 ||
घाव एकांतरा हरते जाना मिट जावे तेरी नज़र से |
चाहे कितना ही पुराना क्यों ना बन गया हो समय से || 103 ||
चाहे कितना ही पुराना क्यों ना बन गया हो समय से || 103 ||
तेरी शुभ दृष्टि मात्र से जीर्णरोगी बन जाते निरोगी |
अनेक यात्री तेरे दरबार में आते है भुक्त भोगी || 104 ||
अनेक यात्री तेरे दरबार में आते है भुक्त भोगी || 104 ||
तेरे चरणों में सिर झुकाकर नित प्रणाम करता हूँ |
भैरवनाथ दया करना तेरी आस पे ही जीता हूँ || 105 ||
भैरवनाथ दया करना तेरी आस पे ही जीता हूँ || 105 ||
हर काम में तू सहायक बने रहना मेरेनाथ |
करोड़ों का तू प्रतिपालक है दुखियों को देता साथ || 106 ||
करोड़ों का तू प्रतिपालक है दुखियों को देता साथ || 106 ||
मंगल वाली कन्या जो भजे मेरी स्तुति का पाठ |
उसी वर्ष उसका विवाह हो जावे संपूर्ण ठाठ बाट || 107 ||
उसी वर्ष उसका विवाह हो जावे संपूर्ण ठाठ बाट || 107 ||
शंका ना करना भक्तों कभी आप इस देव पर |
हम सब परिवार श्रद्धा करते हैं दयालु आप पर || 108 ||
हम सब परिवार श्रद्धा करते हैं दयालु आप पर || 108 ||
जय जय भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ
जय जय भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ
जय जय भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ
विक्रम दो हजार उनत्तीस की
आश्विन शुक्ला षष्ठी
आनंददायक स्तुति रची
नेमीचंद जी की शुभ दृष्टि
आश्विन शुक्ला षष्ठी
आनंददायक स्तुति रची
नेमीचंद जी की शुभ दृष्टि
हर कष्ट के समय आप
गुरुवर मेरे साथ ही रहना
अशोक कुमार यति की
भैरवनाथ बिनती सुनना
गुरुवर मेरे साथ ही रहना
अशोक कुमार यति की
भैरवनाथ बिनती सुनना
सभी भक्तों पर भैरवनाथ
एक सा ध्यान ही रखना
आपके ही चरणों में रुक्मणि को
सदा पास ही रखना
एक सा ध्यान ही रखना
आपके ही चरणों में रुक्मणि को
सदा पास ही रखना
सभी भक्तों पर भैरवनाथ
एक सा ध्यान ही रखना
आपके ही चरणों में रुक्मणि को
सदा पास ही रखना
एक सा ध्यान ही रखना
आपके ही चरणों में रुक्मणि को
सदा पास ही रखना
जय जय भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ
जय जय भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ
जय जय भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ
जय जय भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ
जय जय भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ
जय जय भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ
जय जय भैरवनाथ
नाकोडा भैरवनाथ



Ye adhuri h
Isme 108 gaatha he
Thankyou very much for uploading Nakoda stuti..But why incompleate...My earnest request please complete it thanks again
Stuti ko pura karien
I have requested earlier also....please upload complete Nakoda Bhairav stuti...
धन्यवाद, स्तुति अब पूर्ण हो गई है!
धन्यवाद