शी कहुं कथनी मारी ओ वीर, शी कहुं कथनी मारी ओ वीर ...
जन्म पेला में आपनी पासे, कीधो कोल करारी
अनंत जन्मना कर्म मिटाववा, मनुष्य जन्म दिलधारी हो वीर ... १
संसार वायरानी लहेर थकी हुं, विसरयों आज्ञा तमारी,
बाळपणमां रह्यो अज्ञानी, मनुष्य जन्म गयो हारी ओ वीर ... २
जोबन वयमां विषय विकारी, राची रह्यो दिलधारी,
धर्म न पाम्यो धर्म न साध्यो, धर्मने मेल्यो विसारी हो वीर ... ३
जोतजोतामां घडपण आव्युं, शक्ति गई सहु मारी,
धनदोलत नी आशाए वळग्यो, गयो मनुष्य भव हारी ओ वीर ... ४
भरत भूमि मां पंचम काळे, नहि कोई केवळ धारी,
संदेह सघळां कोण निवारी, मति झंझाय छे मारी ओ वीर ... ५
उदयरत्न करजोडी कहे छे, करो हो महेर मोझारी,
भक्तिवत्सल बहु सहाय करीने, लेजो मुजने उगारी ओ वीर ... ६


