श्री संभवजिन मूरति संदर, जगजन मोहनगारीजी,
सेवकजन मनवांछित पूरण, कल्पवेली अवतारीजी;
बावना चंदन भरीय कचौले, टोळे बहु नर नारीजी,
संभव जिनवर पूजुं भविजन, मुक्तिवधू लहुं सारीजी, १


श्री नंदीश्वर ने मानुषोत्तर, इक्षुकार वैताढ्येजी,
कुलगिरि प्रमुख जिहां शाश्वत, जिन वंदुं चारे नामजी;
अतीत अनागत ऋषभादिक जिन, शत्रुंजय अर्बुद वंदोजी,
इत्यादिक तीरथ जिन सर्वे, पूजी पाप निकंदोजी, २

दो नवकारशी पोरिसी तणा छ, सत्त पुरिमढ एगठाणेजी,
निवि विगई नव एग बिआसण, आयंबिल आठ आगारजी;
छ पाणस्स चार चरिम पच्चक्खाण, ए आगम विचारजी,
मन शुद्धि आराधो भविका, जिम पामो भवपारजी. ३


अरिहंत देव अहर्निश आराधी, साधु तणा गुण रंजेजी,
धर्मध्यान धरी जिन भाख्यो, दुष्कृत दुरित निकंदेजी;
तेह तणां तुं विघ्न निवारे, तुं दुरितारी देवीजी,
विबुधविजय 'सौभाग्ये' समरी, जिन चरणांबुज सेवीजी. ४