श्री सीमंदर निज मुखे, जेनों महिमा गावें छे,
सूरज -चांद ने तारलिया, निशदिन शीश नमावें छे,
रिम् झिम् रिम् झिम् जलधारा, संदेशो ए लावें छे,
सुणजो ... ससनेही प्यारा!
सिद्धाचल बोलावें छे ...


लीली लीली कंदरा, कोयल केली करे
भक्तों ने देखी अही, हईये रे हेळी चढे
गिरि ना सोपाने, गिरि ना गुणगाने
झूमी उठे सौना रे मन,
अलबेला ए आलापो,
अंतरने डोलावें छे
सुणजो ... ससनेही प्यारा!
सिद्धाचल बोलावें छे ...


धर्म महा युग मां, मन ने शांता मळे
संयम ना रंग मां, आत्म कांती करे
प्रीति प्रशमनी, प्रभु वचननी
झूमी उठे सौना रे मन
जनम जनमना पापोंनी, जंजीरो तोडावें छे
सुणजो ससनेही प्यारा!
सिद्धाचल बोलावें छे ...


 विपुल भावों भरी, रहीए चोमासूं अही
जीवन नो जय करी, जावूं छे भवथी,
तरी जन्म सफल भयो, सिद्धिगिरी मलयो,
झूमी उठे सौना रे मन
दूर दूरथी ऋषभजी, भक्तों ने दौडावें छे
सुणजो ... ससनेही प्यारा!सिद्धाचल बोलावें छे ...


शांति जिनेश्वर सोलमा सोल कषाय करी अंत
ते तीर्थेक्वर प्रणमीयें चातुर्मास रहंत॥



Source: Manan Sanghvi