धनद तणे आदेशथी रे, मन मोहना रे लाल,
तिर्यग्जृभक देव रे, जग सोतना रे लाल,
राय सिद्धार्थ ने घर रे, म ... वृष्टि करे नित्यमेव रे।
कनक रयण मुणि रोप्पनी रे, म ... धन कण भूषण पान रे,
वर्सावे फल फूलनी रे, म ... नूतन वस्त्र निधन रे।
वाघे दोलत दिन प्रत्ये रे, म ... तेणे वर्थमान हेत रे,
देशु नाम ज तेनुं रे, म ... मात पिता संकेत रे।
माता नी भक्ति करी रे, म ... निशचल प्रभु रह्या ताम रे,
माता अरति उपनी रे, म ... शुं थयू गर्भने आम रे।
चिन्तातुर सहु देखिने रे, म ... प्रभु हाल्या तेणी वार रे,
लर्ष थयो सहु लोकने रे, म ... आनन्दमय अपार रे।
उत्तम दोहला उपजे रे, म ... देव पूजा दीक भाव रे,
पुरण थाये ते सहु रे, म ... पूरव पुण्य प्रभाव रे।
नव मास पूरा उपरे रे, म ... दिवस साढ़ा सात रे,
उच्च स्थाने ग्रह आवता रे, म ... वायु अनुकूल बात रे।
वसंत ऋतु वन मोरिया रे, म ... जन मन हर्ष न माय रे,
चैत्र मास सुधि तेरेसे रे, म ... जिन जनमिया अढ़धी रात रे।
अजवालु त्रिहु जग थयुं रे, म ... वत्यों जय जयकार रे,
चौथुं बखाण पुरण इलां रे, म ... बद्धुं माणेकविजय हितकार रे।
Source: Sarvangi Savani


