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Library > जैन ज्ञान श्रृंखला
अष्टमंगल: आठ शुभ प्रतीक और उनका अर्थ

अष्टमंगल जैन धर्म के आठ शुभ प्रतीक हैं, स्वस्तिक, श्रीवृक्ष,
भद्रासन, कलश, मीनयुगल, दर्पण, त्रिरत्न और नंदीपद।
ये प्रतीक केवल सजावटी चिन्ह नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक
अर्थ और जीवन‑मार्गदर्शन का संदेश देते हैं।  

पंच महाव्रत: जैन साधना के पाँच स्तंभ

पंच महाव्रत जैन धर्म के पाँच मूल स्तंभ हैं, अहिंसा, सत्य, अस्तेय,
ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह। ये व्रत केवल बाहरी अनुशासन नहीं,
बल्कि विचार, वाणी और कर्म की शुद्धि का मार्ग हैं। गृहस्थ इन्हें अणुव्रत के रूप
में अपनाते हैं, जबकि साधु‑साध्वी कठोरता से जीवनभर निभाते हैं। 

अनेकांतवाद: जैन दर्शन का सबसे अनोखा सिद्धांत
  • अनेकांतवाद जैन दर्शन का मूल सिद्धांत है, जो सत्य को अनेक दृष्टिकोणों से देखने की शिक्षा देता है। यह विचार हमें बताता है कि किसी भी वस्तु या सत्य को केवल एक ही दृष्टि से नहीं समझा जा सकता। "अंधगज न्याय" जैसी कहानियाँ इसके व्यावहारिक महत्व को सरलता से समझाती हैं। आज के समय में यह सिद्धांत सहिष्णुता, संतुलन और गहरी समझ का मार्ग दिखाता है।

  • अहिंसा का जैन दर्शन - आचारांग सूत्र

    अहिंसा का जैन दर्शन आचारांग सूत्र पर आधारित है
    और इसे जैन धर्म की नैतिक नींव बताया गया है।
    इसमें त्रिविध अहिंसा (मन, वचन, काया) और
    नौ प्रकार की हिंसा का विस्तार से वर्णन है। 

    कर्म सिद्धांत

    कर्म सिद्धांत जैन दर्शन का मूल आधार है, जहाँ कर्म को दैवीय
    न्याय नहीं बल्कि सूक्ष्म भौतिक कण माना गया है। यह आठ प्रकार
    के कर्म आत्मा को जन्म-मृत्यु के चक्र में बाँधते हैं
    और निर्जरा व मोक्ष ही मुक्ति का मार्ग बताते हैं।

    चातुर्मास 2026

    चातुर्मास 2026 का आरंभ 15 जुलाई (देवशयनी एकादशी) से होगा
    और समापन 12 नवम्बर (देवउठनी एकादशी) को होगा।
    यह चार माह का पवित्र काल जैन परम्परा में वर्षायोग कहलाता है,
    जिसमें साधु-साध्वियाँ स्थिरवास कर तप, संयम और स्वाध्याय में लीन रहते हैं।

    फागन फेरी की अद्भुत कहानी

    फागन फेरी श्री शत्रुंजय गिरिराज पर फागन सुदी तेरस के दिन की जाने वाली छह गाऊं की पवित्र परिक्रमा है,
    जो सांब और प्रद्युम्न मुनिराज की मोक्ष-प्राप्ति की स्मृति में लगभग ८४ हज़ार वर्षों से चली आ रही है।
    इस लेख में रीटा और मीता की प्रेरणादायक कहानी के माध्यम से गिरिराज की
    इस पावन यात्रा का महत्व सरल और भावपूर्ण रूप से प्रस्तुत किया गया है।

    नाकोड़ा भैरवजी: जैन धर्म के अद्भुत रक्षक देव

    नाकोड़ा भैरवजी की आराधना क्यों करनी चाहिए?
    जानिए इस अनोखी परंपरा की संपूर्ण जानकारी
    क्या आप जानते हैं कि राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित
    एक छोटे से गांव में ऐसी दिव्य शक्ति विराजमान है |

    नवकार मंत्र

    नमो अरिहंताणं
    नमो सिद्धाणं
    नमो आयरियाणं
    नमो उवज्झायाणं

    जैनिज़्म

    जैन धर्म भारत में जन्मा एक प्राचीन धर्म है, 
    जो आध्यात्मिक शुद्धि और आत्मज्ञान का मार्ग सिखाता है। 
    इसके मूल सिद्धांत सभी जीवित प्राणियों के प्रति,
    सख्त अनुशासन और पूर्ण अहिंसा पर केंद्रित हैं।