देव नमो अरिहन्त नित, वीतराग विज्ञान। चन्दनषष्ठी व्रत कथा, कहीं
स्वपरहित जान।। काशी देश में बनारस नाम का प्रसिद्ध नगर है। जिसे
तेईसवें तीर्थकर श्री पार्श्वनाथ भगवान ने अपने शुभ जन्म से पवित्र किया
था। उसी नगर में किसी समय एक सूरसेन नाम का राजा राज्य करता था,
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17 October, 2026
17 October, 2026
जम्बृद्वीप के कुरुजांगल देश में हस्तिनापुर नगर है। वहाँ के राजा
विजयसेन की रानी विजयावती से मुकुटशेखरी और विधिशेखरी नाम की
दो कन्याएँ थीं। इन दोनों बहनों में परस्पर ऐसी प्रीति थी कि एक दूसरी के
बिना क्षण भर भी नहीं रह सकती थीं। निदान राजा ने ये दोनों कन्याएँ
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इस व्रत की विधि इस प्रकार है-कि भादों सुदी दशमी के दिन चारों प्रकार
के आहारों को त्यागकर समस्त गृहारम्भ का त्याग करे और परिग्रह का भी
प्रमाणकर जिनालय में जाकर श्री जिनेन्द्रदेव की भाव सहित
अभिषेकपूर्वक पूजा करे। सामायिक स्वाध्याय करे। धर्म कथा के सिवाय
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ऊँकार हृदय धरू, सरस्वति को शिरनाय।
अक्षयदशमी व्रत कथा, भाषा कहूँ बनाय ।।१।।
इसी राजगृही नगर में मेघनाद नाम के राजा की रानी पृथ्वीदेवी अत्यन्त
रूप और शीलवान थी, परन्तु कोई पूर्व पाप के उदय से पुत्रविहीन होने से
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जैन समुदाय की मान्यताओं में रक्षाबंधन की कथा कुछ अलग है। यह
कथा एक मुनि द्वारा 700 मुनियों की रक्षा करने पर आधारित है। यह
कहानी ही रक्षाबंधन के त्योहार का आधार है।
इस कथा के अनुसार हस्तिनापुर के राजा महापद्म ने अपने बड़े पुत्र
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किंतु सेठानी ने सुनी अनसुनी कर दी और कोई व्यवस्था नहीं की। सेठ
स्वयं आया और शुद्धतापूर्वक बहुतसे पकवान तैयार कर सात सात गुणो
से नवधा भक्तिपूर्वक आहार दिया। सबके निरंतराय आहार से वह बहुत
संतुष्ट हुआ। महाराजने सेठको अक्षयदानमस्तु' नामका आशिर्वाद देविहार किया।
17 October, 2026
काशी देश की बनारस नगरी का राजा महीपाल अत्यंत प्रजावत्सल और
न्यायी था। उसी नगर में मतिसागर नाम का एक सेठ और गुणसुन्दरी नाम
की उसकी स्त्री थी। इस सेठ के पूर्व पुण्योदय से उत्तमोत्तम गुणवान तथा
रूपवान सात पुत्र उत्पन्न हुए।
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जम्बृद्वीप संबंधी भरतक्षेत्र के मगध (बिहार) प्रांत में राजगृही नगर है। वहाँ
के राजा हेमप्रभ और रानी विजयावती थी। इस राजा के यहाँ महाशर्मा
नामक नौकर था और उनकी स्त्री का नाम प्रियंवदा था। इस प्रियंवदा के
गर्भ से कालभैरवी नामक एक अत्यन्त कुरुपी कन्या उत्पन्न हुई कि जिसे
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जम्बृद्वीप के विदेह क्षेत्र में कक्ष नाम का एक देश और वीतशोकपुर नाम
का एक नगर है। वहाँ एक अत्यन्त पुण्यवान वैश्रवण नाम का राजा रहता
था, जो कि पुत्रवत् अपनी प्रजा का पालन करता था।
एक दिन वह (वैश्रवण) राजा बसंत ऋतु में क्रीड़ा के निमित्त उद्यान में यत्र-
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धातकीखण्ड द्वीप के पूर्वविदेह क्षेत्र में विशाल नाम का एक नगर है। वहाँ
का प्रियंकर नाम का राजा अत्यंत नीतिनिपुण और प्रजावत्सल था। रानी
का नाम प्रियंकरा था, और इसके गर्भ से उत्पन्न हुई कन्या का नाम
मृगांकलेखा था।

