एक भिखारी सुबह सुबह भीख मांगने निकला। चलते समय उसने अपनी झोली में
जो के मुट्ठी भर दाने डाल दिए, इस अंधविश्वास के कारण कि भिक्षाटन के लिए
निकलते समय भिखारी अपनी झोली खाली नहीं रखते। येली देखकर दूसरों को भी
लगता है कि इसे पहले से ही किसी ने कुछ दे रखा है।
Library > जैन कथा संग्रह
15 October, 2026
15 October, 2026
चम्पानगरी में प्रियदत्त सेठ रहते थे। उनकी पुत्री का नाम अनन्तमती था।
वह रूपवती तो थी ही और सेठ जी ने विद्याभ्यास करा कर सोने में सुगन्ध
ही मिला दी थी। अष्टाह्निका के पहले सेठ प्रियदत्त श्री धर्मकीर्ति मुनि के
पास गये और अपनी पुत्री को भी साथ ले गये। वहां उन्होनें मुनिराज के
14 October, 2026
जैसा सच्चे देव-शास्त्र-गुरु का स्वरुप यहाँ बताया है वैसा ही है ..
अन्यथा नहीं है .. इस तरीके की सच्चे मार्ग में अटल संशय रहित
रूचि रखने वाले के निशंकित अंग होता है।
मिथ्या मार्गियों के बहकाये में न-आकर मंत्र-यन्त्र-टोटके अदि से जो
14 October, 2026
बहुत समय पहले की बात है, चंदनपुर का राजा बड़ा प्रतापी था, दूर-दूर
तक उसकी समृद्धि की चर्चाएं होती थी, उसके
महल में हर एक सुख-सुविधा की वस्तु उपलब्ध थी पर फिर भी अंदर से
उसका मन अशांत रहता था। उसने कई ज्योतिषियों और पंडितों से इसका
14 October, 2026
एक मूर्तिकार था जो बहुत अच्छी मूर्तियाँ बनाता था और उसकी मूर्तियाँ
भी बहुत अच्छे दामों पर बिकती थी। समय के साथ उसका बेटा भी बड़ा
हो गया तो उसने वही हुनर अपने बेटे को भी सिखा दिया और दोनों बाप
बेटे मूर्तियाँ बनाने लगे और शाम को बाजार में जाकर उनको बेच आते इस
14 October, 2026
बासमती चावल बेचने वाले एक सेठ की स्टेशन मास्टर से साँठ-गाँठ हो
गयी। सेठ को आधी कीमत पर बासमती चावल मिलने लगा।सेठ ने सोचा
कि इतना पाप हो रहा है, तो कुछ धर्म-कर्म भी करना चाहिए।
एक दिन उसने बासमती चावल की खीर बनवायी और किसी साधु बाबा
को आमंत्रित कर भोजनप्रसाद लेने के लिए प्रार्थना की।साधु बाबा ने
बासमती चा...
14 October, 2026
एक नगर का सठ अपार धन सम्पदा का स्वामी था। एक दिन उस अपनी
सम्पत्ति के मूल्य निर्धारण की इच्छा हुई। उसने तत्काल अपने लेखा
अधिकारी को बुलाया और आदेश दिया कि मेरी सम्पूर्ण सम्पत्ति का मूल्य
निर्धारण कर ब्यौरा दीजिए, पता तो चले मेरे पास कुल कितनी सम्पदा है।
14 October, 2026
एक गांव मे एक बहुत गरीब सेठ रहता था जो कि किसी जमाने बहुत बड़ा
धनवान था जब सेठ धनी था उस समय सेठ ने बहुत पुण्यं किए गउशाला
बनवाई गरीबों को खाना खिलाया अनाथ आश्रम बनवाए और भी बहुत से
पुण्य किए थे लेकिन जैसे जैसे समय गुजरा सेठ निर्धन हो गया।
14 October, 2026
चम्पापुर नगर में एक सेठ और सेठानी थे। दोनों बहुत ही धर्मात्मा और
दयालु थे। उसी नगर में एक साफ सफाई करने वाले, भीख मांग कर खाने
वाले, मजदूरी करके जैसे तैसे मुशिकल से कमाने वाले गरीब मेतर पति
पत्नी रहते थे। जिनमें आपस में अच्छा प्रेम था दिन भर जो भी मिलता वो
21 April, 2026
चंद्रप्रभ स्वामी जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर हैं। उनका प्रतीक चिह्न चंद्रमा है,
जो शीतलता और शांति का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने अहिंसा, सत्य
और संयम का उपदेश देकर जीवों को मोक्षमार्ग की ओर प्रेरित किया।
उनकी पूजा से साधक को मानसिक शांति और आत्मिक उत्थान की अनुभूति होती है।

