आदिनाथ प्रभु हर रूप में मिल जाते हैं, मौन, आहट या मुस्कान में।
जीवन कर्मों की खेती है, जो बोएगा वही काटेगा।
नेकी बाँटने वाला स्वयं भी सुगंधित होता है।
सच्चा तीर्थ बाहर नहीं, भीतर की श्रद्धा और साधना में है।
Library > शत्रुंजय स्तवन
15 June, 2026
28 June, 2025
लागी रे लागी रे लागी -3
लागी रे लागी रे लागी-3
लागी लगनवा छोड़ी न छुटे,
ऋषभ जिनन्द दयाल हो मोरी लागी लगनवा
28 June, 2025
आदीनाथा मेरी अरदास है
तेरे दर्शन की प्यास है हो ... तेरे दर्शन की प्यास है
तू मेरी सांसे तू मेरी धड़कन
तेरे चरणो मे मै हूं अर्पण
28 June, 2025
चाँद सितारे फूल और खुशबू ... (2)
ये तो सारे पुराने हैं,
शत्रुंजय में सजके बैठा,
हम उसके दीवाने हैं।
28 June, 2025
ऋषभजी बोलावे छे, एना सपना आवे छे
जे एना थई जावे छे, एना ए थई जावे छे.
ऋषभजी बोलावे छे ...
सपनामां एनाथी वातो थाय; आंख खूले त्यां सौ पहेला देखाय,
27 June, 2025
गिरिराज ... आदिनाथ ...
बैठे है ... मेरे भीतर में ... (3)
तीर जाऊ में भव समंदर से,
तीर जाऊ में भव समंदर से
27 June, 2025
सिद्धाचल दरबार झाझरमान लागे छे,
राजा ऋषभ देव महरबान लागे छे।
आज अनंता सिद्धोंनो एहसान लागे छे,
शाश्वत सुखना अही सम्मान लागे छे।
26 June, 2025
शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन को, करुं प्रणाम |
उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम ||
सर्व साधु और सरस्वती जिन मन्दिर सुखकार |
आदिनाथ भगवान को मन मन्दिर में धार ||
25 June, 2025
दादा आदेश्वरजी, हो दादा आदेश्वरजी दूर थी
आव्यो दादा दर्शन द्यो
कोई आवे हाथी घोड़े,
कोई आवे चढ़े पालने ... (2)
24 June, 2025
व्हाला आदिनाथ में तो पकड्यो तारो हाथ,
मने देजो सदा साथ .. हो .. व्हाला आदिनाथ हो
आव्यो तुम पास .. लइ मुक्तिनी एक आश,
मने करशो ना निराश .. हो .. व्हाला आदिनाथ हो ... (१)

